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ये दो दिल है चंचल हवाओ के झोंके

ये दो दिल है चंचल हवाओ के झोंके इन्हें कोन बांधे इन्हें कोन रोके कभी चल दिए हम घटाओ के पीछे, कभी रह गये हैं बहारो में खोके इन्हें कोन बांधे इन्हें कोन रोके----------------------------------------------------------------------------- किरन  भोर की मेरी बिंदिया बनेगी-२, मेरी मांग में सांज लाली भरेगी -२ तेरे संग चली में ये सपने संजोके-२, हमे कोन बांधे हमे कोन रोके लगू   अंग जो में बनू तेरा गहना, जो काजल बनू चुमलू तेरे नैना-२ कभी में ये सोचु कभी मन ये सोचे-२, हमे कोन बांधे हमे कोन रोके हमे कोन बांधे हमे कोन रोके--------------------------------------------------------------------------------- जहाँ   जाउंगी संग तुझे ले चलुगी-२, तुझे अपने आँचल से बांधे रहूंगी -२ कहाँ जायेगा तू मेरे मन से होके-२, हमे कोन बांधे हमे कोन रोके हमे कोन बांधे हमे कोन रोके-----------------------------------------------------------------------

तेरी बेवफ़ाई का शिकवा करूँ तो

तेरा नाम जान-ए-वफ़ा है मगर तू बड़ी बेवफ़ा है मेरी जान तुझ पर फ़िदा है मगर तू बड़ी बेवफ़ा है तेरी बेवफ़ाई का शिकवा करूँ तो ये मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी -2 भरी बज़्म में तुझको रुसवा करूँ तो ये मेरी शराफ़त की तौहीन होगी -2 तेरी बेवफ़ाई का शिकवा … न महफ़िल में होंगी न मेले में होंगी ये आपस की बातें अकेले में होंगी मैं लोगों से तेरी शिक़ायत करूँ तो ये मेरी शिक़ायत की तौहीन होगी -2 तेरी बेवफ़ाई का शिकवा … सुना है तेरा और भी एक बलम है मगर ग़म न कर तुझको मेरी कसम है तुझे बेशरम बेमुरव्वत कहूँ तो ये मेरी मुहब्बत की तौहीन होगी -2 तेरी बेवफ़ाई का शिकवा …

में जिस दिन भुला दूं तेरा प्यार दिल से

मैं जिस दिन भुला दूँ तेरा प्यार दिल से ... वो दिन आखरी हो मेरी ज़िन्दगी का... ये आँखें उसी रात हो जाए अंधी... जो देखे तेरे सिवा सपना किसी का... मुझे अपने दिलसे उतरने न देना... में खुसबू हूँ मुझे बिखरने न देगा... रहे तू हमेशा इन बाजूओं में... न टूटे ये बंधन कभी दोस्ती का... मेरी धडकनों में मोहब्बत है तेरी... मेरी ज़िन्दगी अब अमानत है तेरी... तमन्ना है इन रास्तो पे चले तुम... निशाँ हो वहां मेरी बन्दिगी का... मैं जिस दिन भुला दूँ तेरा प्यार दिल से... वोह दिन आखरी हो मेरी जिंदगी का ...

तेरे मेरे होंठों में मीठे मीठे गीत मितवा

फ़: तेरे मेरे होंठों में मीठे मीठे गीत मितवा म: आगे आगे चलें हम , पीछे पीछे प्रीत मितवा फ़ : पहले पहले प्यार की पहली रात याद रहेगी म: फूलों के , इस शहर की , मुलक़ात याद रहेगी फ़: काश यहीं सारी उम्र यूँही जाए बीत मितवा फ़/म: आगे आगे चलें हम , पीछे पीछे प्रीत मितवा फ़: अँखियों में तू बस जा , अँखियाँ मैं बंद कर लूँ म: पहले इन अँखियों से बातें मैं चंद कर लूँ फ़: तेरी इन्हीं बातों ने लिया मुझे जीत मितवा फ़/म: आगे आगे चलें हम , पीछे पीछे प्रीत मितवा फ़: छोटे छोटे दिन रात , लम्बी लम्बी बातें हैं म: जळी है किस बात की , बड़ी मुलक़ातें हैं फ़: बातों मुलक़ातों में उम्र जाए बीत मितवा फ़/म: आगे आगे चलें हम , पीछे पीछे प्रीत मितवा

बड़े अच्छे लगते हैं

बड़े अच्छे लगते हैं , ये धरती , ये नदिया , ये रैना और-   और तुम... बड़े अच्छे लगते हैं , ये धरती , ये नदिया , ये रैना और-   और तुम ओ माझी रे , जइयो पिया के देस हम तुम कितने पास हैं कितने दूर हैं चाँद सितारे सच पूछो तो मन को झूठे लगते हैं ये सारे हम तुम कितने पास हैं कितने दूर हैं चाँद सितारे सच पूछो तो मन को झूठे लगते हैं ये सारे मगर सच्चे लगते हैं , ये धरती , ये नदिया , ये रैना , और तुम बड़े अच्छे... तुम इन सबको छोड़के कैसे कल सुबह जाओगी मेरे साथ इन्हें भी तो तुम याद बहुत आओगी तुम इन सबको छोड़के कैसे कल सुबह जाओगी मेरे साथ इन्हें भी तो तुम याद बहुत आओगी बड़े अच्छे...

में हूँ प्रेम रोगी मेरी दावा तो कराओ

अरे कुछ नहीं , कुछ नहीं - २ फिर कुछ नहीं है भाता जब रोग ये लग जाता मैं हूँ प्रेम रोगी हाँ मैं हूँ प्रेम रोगी मेरी दवा तो कराओ मैं हूँ प्रेम रोगी मेरी दवा तो कराओ ओ जाओ जाओ जाओ कोई वैध को बुआओ मैं हूँ प्रेम रोगी कुछ समझा कुछ समझ न पाया दिल वाले का दिल भर आया और कभी सोचा जायेगा क्या कुछ खोया क्या कुछ पाया जा तन लागे वो तन जाने - २ ऐसी है इस रोग की माया मेरी इस हालत को हाँ मेरी इस हालत को नज़र ना लगाओ ओ जाओ जाओ जाओ कोई वैध को बुआओ मैं हूँ प्रेम रोगी हो ओ ओऽ सोच रहा हूँ जग क्या होता इसमें अगर ये प्यार न होता मौसम का एहसास न होता गुल गुलशन गुलज़ार न होता होने को कुछ भी होता पर - २ ये सुंदर संसार न होता मेरे इन ख़यालों में मेरे इन ख़यालों में तुम भी डूब जाओ जाओ जाओ जाओ कोई वैध को बुआओ मैं हूँ प्रेम रोगी यारो है वो क़िस्मत वाला प्रेम रोग जिसे लग जाता है सुख - दुख का उसे होश नहीं है अपनी लौ में रम जाता है हर पल ख़ुद ही ख़ुद हँसता है हर पल ख़ुद ही ख़ुद रोता है ये रोग लाइलाज़ सही फिर भी कुछ कराओ ओ जाओ जाओ जाओ अरे जाओ जाओ जा...

चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है

चिट्ठी आई है आई है चिट्ठी आई है - २ चिट्ठी है वतन से चिट्ठी आयी है बड़े दिनों के बाद , हम बेवतनों को याद - २ वतन की मिट्टी आई है , चिट्ठी आई है ... ऊपर मेरा नाम लिखा हैं , अंदर ये पैगाम लिखा हैं - २ ओ परदेस को जाने वाले , लौट के फिर ना आने वाले सात समुंदर पार गया तू , हमको ज़िंदा मार गया तू खून के रिश्ते तोड़ गया तू , आँख में आँसू छोड़ गया तू कम खाते हैं कम सोते हैं , बहुत ज़्यादा हम रोते हैं , चिट्ठी ... सूनी हो गईं शहर की गलियाँ , कांटे बन गईं बाग की कलियाँ - २ कहते हैं सावन के झूले , भूल गया तू हम नहीं भूले तेरे बिन जब आई दीवाली , दीप नहीं दिल जले हैं खाली तेरे बिन जब आई होली , पिचकारी से छूटी गोली पीपल सूना पनघट सूना घर शमशान का बना नमूना - २ फ़सल कटी आई बैसाखी , तेरा आना रह गया बाकी , चिट्ठी ... पहले जब तू ख़त लिखता था कागज़ में चेहरा दिखता था - २ बंद हुआ ये मेल भी अब तो , खतम हुआ ये खेल भी अब तो डोली में जब बैठी बहना , रस्ता देख रहे थे नैना - २ मैं तो बाप हूँ मेरा क्या है , तेरी माँ का हाल बुरा है तेरी बीवी करती है सेवा , सूरत से लगती हैं बे...