वादा रहा सनम, होंगे जुदा न हम

अलका: वादा रहा सनम, होंगे जुदा न हम
चाहे न चाहे ज़माना, हमारी चाहतों का
मिट ना सकेगा फ़साना
अभीजीत: वादा रहा सनम, होंगे जुदा न हम
चाहे न चाहे ज़माना, हमारी चाहतों का
मिट ना सकेगा फ़साना
अलका: (इन वादियों में यूं ही मिलते रहेंगे
दिल में वफ़ा के दिये जलते रहेंगे ) \-
ये माँगा है दुआओं में, कमी न हो वफ़ाओं में
रहे तेरी निगाहों में, देखो न इन फ़िज़ाओं में ओ जाने जां
हमारी चाहतों का ...

अभीजीत: (कैसी उदासी तेरे चेहरे पे छाई
क्या बात है जो तेरी आँख भर आई) \-
देखो तो क्या नज़ारे हैं, तुम्हारी तरह प्यारे हैं
हंसो न मेरे लिये तुम, सभी तो तुम्हारे हैं ओ जाने जां
हमारी चाहतों का ...
दोनो: वादा रहा सनम, होंगे जुदा न हम
चाहे न चाहे ज़माना, हमारी चाहतों का
मिट ना सकेगा फ़साना


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